सोंमालोब समा• क्र•978 सिरसक - निकही बरसा निकही बरसा होत फलाने, चला करा तईयारी हो, यहे मेर झो बरसत रही तो, दाना उगी बहु भारी हो| रोप...
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सोंधी माटी लोनी बघेली व्हाट्स अप साहित्य मंच पर प्रस्तुत रचना विषय - ठाठ - बड़ेरी दिनांक -०४-०७-२०२० दिन-शनिवार ठाठ टंगी बडेरी के ऊपर, ...
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बांधवगढ़ नील गज़ल-३
बात जो भी यार कहकर देखिए, बिन हमारे पल भी रहकर देखिए, बांधवगढ़-नील गज़ल -३ जो सहे हम दर्द अपने आपका, कुछ दिनों तक आप सहकर देखिए, ...
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नील मुक्तक
हजार दोस्त बनाये होगें मैनें पर तुम सा बनाया नही, बांधवगढ़ नील मुक्तक किस्सा दिल में दबा का दबा किसी को सुनाया नही, सारी दौलत झोंक दी...
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बांधवगढ़ नील गज़ल-2
लो क्या याद करोंगे हमारी शहादत सनम, बांधवगढ़-नील-ग़जल-2 प्यार करके छोड़ देना तुम्हारी आदत सनम| भींगे ओंठ गीली आँखो का जबाब नहीं...
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बांधवगढ़ नील गज़ल-1
बांधवगढ़ नील गज़ल-1 कर माफ़ दे साथी गलती कल की, देख मेरी हालात आज इस पल की| गुमान न कर पलकों पर बैठा ले, कौन सी बात तेरे दिल को खल क...
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वर्तमान शिक्षा की स्थिति
आज जुलाई का आखिरी दिन, यानी यह महिना भी बच्चों के पढ़ाई के लिये लिए खत्म| इस महीने को मैं इस लिए भी खास मानता हूं क्योंकि यह किसी भी ...
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सोंमालोब समा• क्र•978 सिरसक - निकही बरसा निकही बरसा होत फलाने, चला करा तईयारी हो, यहे मेर झो बरसत रही तो, दाना उगी बहु भारी हो| रोप...